नमित मल्होत्रा द्वारा निर्मित और नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित “रामायण” प्रदर्शन के लिए तैयार है। हाल ही में फिल्म के प्रचार के दौरान साई पल्लवी ने कहा “Ravana is not all bad. It is important that we spot the Ravana in us and we make changes overtime” अर्थात् रावण पूर्णतया बुरा नहीं है और हमें अपने भीतर के रावण को पहचानकर समय के साथ बदलना चाहिए। यह एक विश्लेषणात्मक और दार्शनिक कथन है जिसे दशहरे के अवसर पर बहुधा दोहराया जाता है कि हमें अपने भीतर के रावण का दहन करना चाहिए। हालांकि यह बात फिल्म में सीता बनी साई पल्लवी के बजाय रावण बने यश के मुख से सुनने को मिलती तो बेहतर होता क्योंकि रावण के चरित्र को आत्मसात् करने के प्रयास में उन्हें उसकी अच्छाइयां भी पता चली होंगी।
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अस्तु, रामायण की सीता मिथिला से थी जबकि साई पल्लवी तमिळनाड से हैं और ऊटी के समीप कोतगिरि के बडुगा समुदाय से संबंध रखती हैं। तमिळनाड उस राजनीतिक दौर का साक्षी भी रहा है जब पेरियार के प्रभाव में कई बार भगवान राम को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और रावण का गुणगान हुआ। राम आर्य थे और रावण द्रविड़ इस धारणा के चलते स्थानीय लोग रावण को अपना हितैषी मानते हैं और रावण के प्रति उदार दृष्टिकोण रखते हैं। वाल्मीकि रामायण के बाद रची गयी कम्ब रामायण रावण के प्रति उतनी कठोर नहीं है।
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कम्ब का रावण निर्मम, हिंसक और वासना लोलुप नहीं था। वह पराक्रमी योद्धा था जो सीता को देखे बिना ही उस पर अनुरक्त हो उठा था। शूर्पणखा ने उसके सामने सीता के रूप का वर्णन ही इस प्रकार किया कि सीता की छवि उसके मानसपटल पर चित्रित हो गयी। हालांकि सीता का वर्णन करते हुए स्वयं शूर्पणखा राम के विचारों में खोई हुई थी। भाई बहन की यह विचित्र मनोदशा और विरोधाभास कम्ब रामायण के सबसे सुंदर प्रसंगों में से एक है।
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रावण के वध पर विलाप करती हुई मंदोदरी का उपालंभ भी सीता के लिए रावण की आसक्ति को ही उजागर करता है:
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वेल एरक्क्यं सडैमुडियान वेर्प एडुत्त तिरुमेनि मेलुम कीड़ुम
येल इरुक्कुम इडनिन्ड्रि उयिर इरुक्कुम इडन्नाडी इड़ैत्तवारोआ
कल इरुक्कुम मलर्क्कून्दल सानाकियै मनम सिरैयिल करन्द कादल
उल्लिरुक्कुम एनक्करुदि उडल पुकुन्द तडवियत्तो ओरुवान वाली
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अर्थात्
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क्या राम ने श्वेत पुष्पों को धारण करने वाले भगवान शिव के कैलास पर्वत को उठाने वाले तुम्हारे सुगठित शरीर में तुम्हारे प्राण खोजने के लिए उसे अपने बाणों से पूरी तरह से बींध डाला। अथवा इस आशंका से कि सुंदर केश वाली सीता अब भी तुम्हारे हृदय में कैद है उस अद्वीतीय धनुर्धारी ने तुम्हारे पूरे शरीर को अपने तीरों से छान डाला।
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2010 में रामायण से प्रेरित और मणिरत्नम द्वारा निर्देशित तमिळ फिल्म रावन भी रावण के प्रति उदार दृष्टिकोण से बनाई गयी फिल्म थी।
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