. हिन्दी में एक कहावत है, हाथ कंगन को आरसी क्या पढ़े लिखे को फारसी क्या। यह कहावत संभवत: तब से चली आ रही है जबसे भारत में फारसी एक प्रमुख प्राशासनिक भाषा थी। फारसी भाषा का उद्भव पहलवी भाषा से हुआ है। पहलवी और संस्कृत भगिनी भाषाएं हैं। अस्तु, हिन्दी-अंगरेजी के इस युग में […]
Read More... गोलू शब्द सुनकर किसी उत्तर भारतीय के मन में किसी प्यारे से गोल मटोल बच्चे की छवि उभरती है, गोलू कई बच्चों को प्यार से बुलाया भी जाता है, किंतु दक्षिण भारत में गोलू या कोलू मिट्टी या लकड़ी से बने उन खिलौनों को कहते हैं जिनसे नवरात्र पर वे अपने घर को सजाते […]
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