Author: Ajay Singh Rawat

भवतारिणी की भावभीनी विदाई: मयिल पोले पोन्‍न ओन्‍न

. 25 जनवरी 2024 को इलैयाराजा की पुत्री और तमिळ सिनेगायिका भवतारिणी का निधन हो गया। वह दीर्घकाल से यकृत कर्करोग से ग्रस्‍त थी। उनके निधन से सम्‍पूर्ण तमिळ समुदाय शोकनिमग्‍न हो गया। अपनी एक सुरीली गायिका को असमय खोने के दुख के साथ ही उसके पिता और अपने प्रिय संगीतकार की वेदना ने भी […]

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एनिमल के यौन आखेट का व्‍याधगीत: जमाल कोदु

. हिन्‍दी में एक कहावत है, हाथ कंगन को आरसी क्‍या पढ़े लिखे को फारसी क्‍या। यह कहावत संभवत: तब से चली आ रही है जबसे भारत में फारसी एक प्रमुख प्राशासनिक भाषा थी। फारसी भाषा का उद्भव पहलवी भाषा से हुआ है। पहलवी और संस्‍कृत भगिनी भाषाएं हैं। अस्‍तु, हिन्‍दी-अंगरेजी के इस युग में […]

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तमिळ नवरात्र में यह गोलू कोलू क्‍या है?

. गोलू शब्‍द सुनकर किसी उत्‍तर भारतीय के मन में किसी प्‍यारे से गोल मटोल बच्‍चे की छवि उभरती है, गोलू कई बच्‍चों को प्‍यार से बुलाया भी जाता है, किंतु दक्षिण भारत में गोलू या कोलू मिट्टी या लकड़ी से बने उन खिलौनों को कहते हैं जिनसे नवरात्र पर वे अपने घर को सजाते […]

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चंद्रमुखी

शृंगार और प्रतिकार: चंद्रमुखी के दो अवतार

चंद्रमुखी अर्थात् शशिवदना अर्थात् चंद्रमा जैसे मुख वाली। सदियों से यह उपमान सुंदर स्‍त्रियों के लिए प्रयुक्‍त होता रहा है और अब तक इसकी आभा फीकी नहीं पड़ी है। आप किसी सुंदरी को जगतसुंदरी, विश्‍वसुंदरी, परमसुंदरी के विशेषणों से ही क्‍यों न विभूषित कर दें जब तक चंद्रमा से उसकी तुलना न की जाए तब […]

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मलयालम की मेरी एकलव्‍य साधना

प्रारंभ में ही स्‍पष्‍ट करना चाहूंगा क‍ि शीर्षक में उल्‍ल‍िख‍ित एकलव्‍य की प्रत‍िभा और न‍िष्‍ठा से मेरा कोई सादृश्‍य नहीं है। क‍िंतु गुरू का अभाव एकमात्र कारण है जो मुझे एकलव्‍य और अपने ल‍िए एक सा जान पड़ता है। लगभग एक दशक पूर्व तम‍िळ सीखने की मेरी इच्‍छा मुझे मलयालम सीखने की ओर ले गयी […]

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एल‍ि‍फेंट व्‍ह‍िसपरर्स

एल‍िफेन्‍ट व्‍ह‍िसपरर्स: हाथी तम‍िळों के साथी

वर्ष 2023 की एक भारतीय भाषायी और स‍िनेमाई उपलब्‍ध‍ि यह रही क‍ि तम‍िळ वृत्‍तच‍ित्र “एल‍िफेन्‍ट व्‍ह‍िसपरर्स” ने ऑस्कर पुरस्‍कार जीता। रूपहले परदे पर संजोयी गयी मनुष्‍य और हाथी के पारस्‍पर‍िक स्‍नेह की यह कानाफूसी तम‍िळनाड के उदगमण्‍डलम् या ऊटी में सुनाई देती है जहां का आद‍िवासी समुदाय काट्टनायकन पीढ़ी दर पीढ़ी हाथ‍ियों के लालन पालन […]

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कैशोर्य की काव्‍यरचना: बाल श्रम‍िक

. कुछ द‍िनों पहले अपनी पुरानी वस्‍तुएं न‍िहारते हुए एक स्‍वरच‍ित कव‍िता “बाल श्रम‍िक” हाथ लग गयी। शेष कव‍िताओं की तुलना में यह इसल‍िए व‍िश‍िष्‍ट थी क‍ि मैंने इसे व‍िद्यालय स्‍तरीय कव‍िता प्रत‍ियोग‍िता में भेजने का न‍िश्‍चय क‍िया था। इसे टंक‍ित करवाकर मैं अपने प्रधानाचार्य से हस्‍ताक्षर‍ित करवाने भी गया था। अपना संकोच छोड़कर इतना […]

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तम‍िळनाड बनाम तम‍िळगम: “शब्‍दभेदी” बाण और “राज्यनीत‍िक” औच‍ित्‍य

. आमतौर पर गैरतम‍िळ अपने तम‍िळ भाषा के अज्ञान के कारण तम‍िळों के न‍िशाने पर रहते हैं। क‍िंतु इस बार कुछ व‍िपरीत हूआ है। अज्ञान की भांत‍ि अत‍िज्ञान भी कभी कभी व‍िवाद उत्‍पन्‍न कर देता है। यह प्रसंग इसी बात का एक अच्‍छा उदाहरण है। तम‍िळनाड में पोंगल के हर्षोल्‍लास के वातावरण में एक शासकीय […]

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पेर‍ियार

द्रव‍िड़ राजनीत‍ि के बापू: तन्‍दै पेर‍ियार

पेर‍ियार दक्ष‍िण भारतीय राजनीत‍ि का एक प्रखर व्‍यक्त‍ित्‍व हैं ज‍िन्‍होंने वहां के जनसाधारण में सामाज‍िक समानता और आत्‍मसम्‍मान का अलख जगाया। तम‍िळनाड की राजनीत‍ि का न‍िरालापन पेर‍ियार की ही देन हैं। . जो ह‍िन्‍दू धर्म की व‍िशेषताओं में रूच‍ि रखते हैं उन्‍हें तम‍िळनाड अत्‍यंत धार्म‍िक प्रतीत होगा। ललाट पर व‍िभूत‍ि या कुमकुम लगाने वाले लोग, […]

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कुश की अंगूठी पव‍ित्री

पव‍ित्री: एक गुमशुदा नाम की घरवापसी

दोपहर को डाक‍िया मां के हाथ में ल‍िफाफा थमा गया। मां उसे मुझे देते हुए बोली, “देख तो, आधार कार्ड आ गया है शायद। ल‍िफाफा खोलकर देखा तो मेरी बांछे ख‍िल गयीं। प‍िछले दो वर्षों की मेरी दौड़ धूप सफल हो गयी। मां का आधार कार्ड उनके मौल‍िक नाम व जन्‍मत‍िथ‍ि के साथ अद्यतन‍ित (updated) […]

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