Month: October 2021

आण्‍डाल की मनोहारी भक्‍त‍िरचना: त‍िरुप्‍पावै

1. मारगड़ीत्‍त‍िंगल मद‍ि न‍िरैन्‍दा नन्‍नालाल नीराडप्‍पोदुवीर पोदुम‍िनो नेर‍िड़ैयीर सीर मलगुम आयप्‍पाडीच्‍चेल्‍वच्‍चि‍रूमीरगाल कूरवेल कोडुन्‍दोड़‍िलान नन्‍दगोपन कुमरन् एरान्‍द कन्‍नी यसोदै इलम स‍िंगम कार मेनी सेनगन कद‍िर मद‍ियम पोल मुगत्‍तान नारायणने नमक्‍के पारै तरूवान पारोर पुगड़ाप्‍पड‍िन्‍देलोर एम्‍पावाय ।। . . अरी सुसज्‍ज‍ित कुमार‍ियों यह मार्गशीर्ष की पूर्ण‍िमा का शुभ द‍िन है। जो यमुना में स्‍नान की इच्‍छुक हैं […]

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पोन्‍न‍िय‍िन सेल्‍वन: कल्‍क‍ि की कृत‍ि और स‍िनेमा का ऐश्‍वर्य

. मणिरत्‍नम् द्वारा सहन‍िर्म‍ित और न‍िर्देश‍ित इस चलच‍ित्र ने तम‍िळ लेखक कल्‍क‍ि की कालजयी कृत‍ि पोन्‍न‍िय‍िन सेल्‍वन को फ‍िर से चर्चा में ला द‍िया है। पोन्‍न‍िय‍िन सेल्‍वन का अर्थ है पोन्‍नी नदी का पुत्र। इस कथा का जन्‍म उस कथाकार के हृदय में हुआ जो पोन्‍नी अथवा कावेरी नदी के क‍िनारे पला बढ़ा। कावेरी नदी […]

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कण्‍णदासन् और कर्ण से कृष्‍ण की क्षमायाचना

प्रस‍िद्ध तम‍िळ कव‍ि और स‍िनेगीतकार कण्‍णदासन् की कालजयी रचनाओं में से एक है चलच‍ित्र कर्णन् का यह गीत। वीर, दानी और कुन्‍ती का पुत्र होने के बावजूद कर्ण अभागा ही रहा । यह गीत न केवल कर्ण को कृष्‍ण की श्रद्धांजल‍ि है बल्क‍ि कर्ण से कृष्‍ण की क्षमायाचना भी है। ह‍िन्‍दी में मैथ‍िल‍ीशरण गुप्‍त ने […]

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