रणबली की शप्‍तभूम‍ि: रायलसीमा

Ajay Singh Rawat/ October 14, 2026
रणबाली

नवदम्‍पति‍ व‍िजय देवरकोण्‍डा और रश्‍म‍िका मंदाना की आगामी फ‍िल्‍म रणबाली को लेकर दर्शकों में खासा उत्‍साह है। उनके व‍िवाह के दो द‍िन बाद ही इस फ‍िल्‍म का पोस्‍टर भी जारी क‍िया गया। उनके व‍िवाह की तस्‍वीरों में जहां श‍िव पार्वती की द‍िव्‍य झलक द‍िखी वहीं रणबाली के पोस्‍टर ने उस गुज़रे जमाने की याद ताज़ा कर दी जब लोग कैमरे के सामने बनावटी मुस्‍कान और मुद्राओं के बजाय अपनी स्‍वाभाव‍िक भाव भंग‍िमा के साथ प्रस्‍तुत होते थे। रणबाली की पृष्‍ठभूम‍ि में ब्र‍िट‍िश राज के अत्‍याचार झेलने वाला अट्ठारहवीं सदी का रायलसीमा है। गैर तेलुगु भाष‍ियों के ल‍िए रायलसीमा आंध्रप्रदेश का एक भूभाग मात्र है क‍िंतु तेलुगु भाष‍ियों के ल‍िए रायलसीमा के मायने इससे कहीं अध‍िक हैं। वे रायलसीमा के ऐत‍िहास‍िक और सांस्‍कृत‍िक पहलु से भी पर‍िच‍ित हैं। इसल‍िए तेलुगु और गैर तेलुगु दर्शक के रूप में इस फ‍िल्‍म से जुड़ने की अनुभूत‍ि न‍िस्‍संदेह भ‍िन्‍न भ‍िन्‍न होगी।

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रायलसीमा के अन्‍तर्गत आन्‍ध्रप्रदेश के अनन्‍तपुर, करनूल, कड़प और च‍ित्तूर ज‍िले आते हैं। ब्र‍िट‍िश काल में यह प्रदेश “दत्त मण्‍डलालु” या सीडेड ड‍िस्‍ट्र‍िक्‍ट्स (ceded districts) कहलाता था क्‍योंक‍ि हैदराबाद के न‍िजाम ने युद्ध में म‍िले सहयोग के बदले इसे ब्र‍िट‍िश राज को सौंप द‍िया था। यह नाम दासता का सूचक था इसल‍िए 17-18 नवंबर 1928 में नन्‍द्याला, करनूल में आयोज‍ित आंध्र महासभा में गाडीचरला हर‍िसर्वोत्तम राव ने इसे रायलसीमा नाम द‍िया। रायलसीमा व‍िजयनगर साम्राज्‍य की याद द‍िलाता है जहां के राजा “राय” अथवा “रायालु” को पदवी के रूप में धारण करते थे। रायलसीमा की सीमाएं व‍िजयनगर साम्राज्‍य के अंतिम राजवंश अरव‍िड़ु के साम्राज्‍य व‍िस्‍तार से म‍िलती हैं। यहां के न‍िवास‍ी अपने प्रदेश को राया देसम भी कहते हैं। बहुमूल्‍य रत्‍नों और नगीनों का स्रोत होने के कारण रायलसीमा को रत्‍नालसीमा भी कहा जाता है। वेंकटेश्‍वर प्रभु पर हजारों संकीर्तन रचने वाले अन्‍नमय्या का जन्‍म भी रायलसीमा में ही हुआ था। तेलुगु की सर्वप्रथम ल‍िप‍ि रायलसीमा के कड़प ज‍िले में प्राप्‍त हुई थी। रायलसीमा की तेलुगु तम‍िळ के न‍िकट है और तटीय आंधप्रदेश में प्रचल‍ित उस तेलुगु से बहुत भ‍िन्‍न है जि‍स पर संस्‍कृत का गहरा प्रभाव है।
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रणबाली को 2019 में साह‍ित्‍य अकादमी से पुरस्‍कृत और बन्‍डी नारायणस्‍वामी द्वारा ल‍िख‍ित तेलुगु उपन्‍यास शप्‍तभूम‍ि से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इस उपन्‍यास की पृष्‍ठभूम‍ि में भी अट्ठारहवीं सद‍ी का रायलसीमा है जो सूखे, अकाल और सामंती सरदारों (पालेगाल) के पारस्‍पर‍िक संघर्ष की गंभीर व‍िभीष‍िका से जूझ रहा था। प्रस‍िद्ध तेलुगु कव‍ि और पत्रकार व‍िद्वान व‍िश्‍वम् ने सूखे, अकाल और गरीबी से त्रस्‍त रायलसीमा के न‍िवास‍ियों का मार्म‍िक च‍ित्रण करते हुए 1956 में “पेन्‍नेटी पाटा” अर्थात् पेन्‍ना नदी का गीत नामक जो लघु काव्‍य रचा था वह आज भी व‍ि‍द्यार्थ‍ियों को पढ़ाया जाता है। कर्णाटक के च‍िक्‍कबल्‍लापुर में नन्‍दी पर्वत से न‍िकलने वाली पेन्‍ना नदी ज‍िस‍े प‍िनाक‍ि‍नी भी कहते हैं, रायलसीमा को सींचती है। इस कव‍िता की कुछ पंक्‍त‍ियां इस प्रकार हैं:
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आकली मंटलु ताललेका कन्‍नभूम‍िन‍ि वद‍िल‍िपेट्ट‍ि
गुण्‍डे लगुलुचु कांत‍ि नि‍ल्‍लु तुडुचुकोनुचु
वलस पोवुचुन्‍नारू जनालु गुम्‍पुलु गुम्‍पुलुगा
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अर्थात्
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भूख की मार को सहने में असमर्थ
अपनी जन्‍मभूम‍ि को पीछे छोड़कर
दुखी हृदय और आंसू पोंछते हुए
लोगों के झुंड के झुंड पलायन कर रहे हैं

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फ‍िल्‍म का नायक सिंगनमला बोब्‍ब‍िली रणबाली भले ही एक काल्‍पन‍िक पात्र हो क‍िन्‍तु उसे रायलसीमा के पालेगाल उय्यालवाड़ नरस‍िम्‍हा रेड्डी और गड़ेकल बोब्‍ब‍िली नाग‍िरेड्डी जैसे स्‍वातंत्र्यवीरों की प्रेरणा से गढ़ा गया है। ब्र‍िट‍िश अध‍िकारी सर थि‍योडोर हेक्‍टर का पात्र 1876 से 1878 के भीषण अकाल में आततायी ब्र‍िट‍िश राज के व‍िशेष अकाल आयुक्‍त सर र‍िचर्ड टेम्‍पल से प्रेर‍ित है।