कुंचन नम्‍बियार का वाग्‍वैदग्‍ध्‍य: का अति लोला, नल्‍लद आलि

Ajay Singh Rawat/ June 2, 2026

एक बार कुंचन नंबियार अपने अपने विद्वान मित्र उण्‍णायि वार्यर के साथ प्रात: काल भ्रमण पर निकले थे। मार्ग में उनका सामना स्‍नान के लिए जाती हुई रानी और केश धोने हेतु ताली की पत्तियां लिए उसकी दासी से हो गया। इन दोनों सुंदरियों को देखकर कुंचन नंबियार जोर से बोल पड़े, “कादिल ओला“ (कानों में कर्णफूल)। प्रतिक्रिया में उनके मित्र ने कहा “नल्‍ला ताली” (बढ़िया केशमार्जक या शैम्‍पू)। रानी और उसकी दासी उनके कथन पर कोई आपत्ति न जताते हुए आगे बढ़ गयी। किंतु कुंचन नंबियार और उनका मित्र हंसने लगे क्‍योंकि उन्‍होंने जो कहा था वह वास्‍तव में संस्‍कृत और मलयाळम के श्‍लेष भाव उत्‍पन्‍न व्‍यंग्य था।
.

का अति लोला अर्थात् कौन अधिक सुंदर है?
नल्‍लद आलि अर्थात् सखी या दासी अच्‍छी है।
.
कुंचन नंबियार ने ओट्टम तुल्‍लल नामक एक नयी कला को जन्‍म दिया। यह साधारण मलयालम शब्‍दों में उनके व्‍यंग्यात्‍मक विचारों को काव्‍यात्‍मक अभिव्‍यक्‍ति थी। ओट्टम तुल्‍लल का शाब्‍दिक अर्थ है दौड़ना कूदना। इसमें प्रस्‍तोता स्‍वयं कविताएं गाता है और उन पर अभिनय भी करता है। इसमें भरपूर ऊर्जा लगती है जो श्रोताओं में भी जोश भर देती है। तुल्‍लल में बहुधा इन चार पंक्‍तियों को दोहराया जाता है:
.

ओट्टम तुल्‍ललिल पलदुम परयुम
अदकोण्‍ड आरक्‍कुम परिभवमरूद
अंगने परिभवम उण्‍डायाल तन्‍ने
इविड़ोरू चुक्‍कुम वरुवानिल्‍ला
.
अर्थात्
.
तुल्‍लम में बहुत सी अप्रिय बातें कही जा सकती है
इसलिए किसी को उनसे नाराज़ नहीं होना चाहिए
यदि आप नाराज़ हुए भी तो कोई परवाह नहीं करेगा
और उसे लेकर यहां कुछ नहीं होने वाला
.

कुंचन नंबियार के वाग्‍वैदग्‍ध्‍य से जुड़ा एक और श्‍लोक बहुत प्रसिद्ध है जो उन्‍होंने तिरवनन्‍तपुरम के महाराज तिरुनाल को चेम्‍बकश्‍शेरी के भोजन के बारे में बताते हुए सुनाया था:
.
पात्रम् विस्‍तृतमात्रा तुम्‍बा मालर तोट्टोडीडिनोरन्‍नवुम्
पुत्तननेय कनियेप्‍पड़ुत्त पड़वुम कालिप्‍पड़म काळनुम्
पत्तंजूरू करिक्‍कुदाश्‍यमियलुम नारंगयुम मांगयुम
नित्‍यम् चेम्‍बकनाट्टिलष्‍टि तयिरमोर तट्टाते किट्टुम् सुखम्