Tag: संस्‍कृत

कुंचन नम्‍बियार का वाग्‍वैदग्‍ध्‍य: का अति लोला, नल्‍लद आलि

एक बार कुंचन नंबियार अपने अपने विद्वान मित्र उण्‍णायि वार्यर के साथ प्रात: काल भ्रमण पर निकले थे। मार्ग में उनका सामना स्‍नान के लिए जाती हुई रानी और केश धोने हेतु ताली की पत्तियां लिए उसकी दासी से हो गया। इन दोनों सुंदरियों को देखकर कुंचन नंबियार जोर से बोल पड़े, “कादिल ओला“ (कानों […]

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एनिमल के यौन आखेट का व्‍याधगीत: जमाल कोदु

. हिन्‍दी में एक कहावत है, हाथ कंगन को आरसी क्‍या पढ़े लिखे को फारसी क्‍या। यह कहावत संभवत: तब से चली आ रही है जबसे भारत में फारसी एक प्रमुख प्राशासनिक भाषा थी। फारसी भाषा का उद्भव पहलवी भाषा से हुआ है। पहलवी और संस्‍कृत भगिनी भाषाएं हैं। अस्‍तु, हिन्‍दी-अंगरेजी के इस युग में […]

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