एक बार कुंचन नंबियार अपने अपने विद्वान मित्र उण्णायि वार्यर के साथ प्रात: काल भ्रमण पर निकले थे। मार्ग में उनका सामना स्नान के लिए जाती हुई रानी और केश धोने हेतु ताली की पत्तियां लिए उसकी दासी से हो गया। इन दोनों सुंदरियों को देखकर कुंचन नंबियार जोर से बोल पड़े, “कादिल ओला“ (कानों […]
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