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2026 के चुनाव में जीत का सेहरा तमिळ सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता सी जोसेफ विजय के सिर पर बंधा है। अपने प्रशंसकों के बीच “तलपति” के नाम से प्रसिद्ध उनके राजनीतिक दल तमिळगा वेट्रि कड़गम ने 108 सीटों पर जीत हासिल की है। दिलचस्प बात यह भी है कि तमिळ में वेट्रि का अर्थ “विजय” होता है।
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लगभग सभी हिन्दी समाचार पत्र तलपति विजय को “थलापति” विजय संबोधित करते हैं और आगे भी करते रहेंगे क्योंकि तमिळ शब्दों के संस्कृत उद्गम पर शोध करने का अवकाश उनके सुधी संपादकों के पास नहीं है। वे इसके बजाय तमिळ शब्दों की अंग्रेजी वर्तनी से निर्धारित विकृत उच्चारण से संतोष कर लेते हैं।
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तलपति वास्तव में संस्कृत के दलपति से ही उद्भूत है जिसका अर्थ होता है सेनानायक। तमिळ सिनेमा के रसिक अपने प्रिय अभिनेताओं को ताला, तलैवा या तलपति नाम से बुलाते रहे हैं। विजय के अतिरिक्त रजनीकांत, कमल हासन और अजित को भी इसी तरह संबोधित किया जाता रहा है।
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विजय की सफलता इस मायने में भी महत्त्वपूर्ण है कि उनसे कहीं अधिक लोकप्रिय अभिनेता रजनीकांत और उनसे कहीं अधिक प्रतिभाशाली और सुप्रसिद्ध अभिनेता कमल हासन भी तमिळ राजनीति में अपना भाग्य आजमा चुके हैं किंतु उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। विजय की सफलता मानों एम जी रामचंद्रन और जयललिता के लोकप्रिय दौर का संकेत देती प्रतीत होती है। विजय ने एम जी रामचंद्रन और जयललिता की विरासत को नये रूप में ढालकर तमिळनाड की राजनीति में प्रस्तुत किया है।
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विजय की राजनीतिक सफलता दो दशकों में परत दर पर गढ़ी गयी उस सिनेमाई छवि की देन है जो कामगारों, छात्रों, कृषकों और नई पीढ़ी के मतदाताओं को आकर्षित करती है। उनके चलचित्रों ने उन्हें आम आदमी की आवाज़ बनाकर प्रस्तुत किया जिसकी जड़ें तमिळनाड की सिने राजनीतिक परिपाटी में गहरे तक जमी हैं। विजय राजनीति में कदम रखने से पहले ही राजनीति का अभ्यास पारंपरिक राजनीतिक अभियानों के बजाय अपने धांसू संवाद, विरोध गीत, लाक्षणिक छवियों और भावावेश से भरे किरदारों के जरिए कर चुके थे।
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विजय पर फिल्माए कुछ लोकप्रिय गानों में राजनीतिक लामबंदी और आम जन द्वारा उठाई गयी आवाज़ मुखर होती है। मर्सल फिल्म का गीत आलपोरन तमिळन तो एक राजनीतिक और सांस्कृतिक राष्ट्रगान जैसा बन गया।
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अड़गिय तमिळ मगन और उसके गीत एल्लापुगड़ुम ने विजय को एक नैतिक रूप से उदात्त लोकप्रिय व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया।
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बिजिल के गीत वेरितनम में उन्होंने अपने समर्थकों को सीधे संबोधित किया। इस गीत ने प्रशंसकों के उत्सव और राजनीतिक लामबंदी के अंतर को धुंधला कर दिया। इस समय तक उनके प्रशंसक समूह राजनीतिक कार्यकर्ताओं की तरह जनकल्याण गतिविधियों में सक्रिय होने लगे थे।
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सचिएन के गीत वा वा एन तलैवा और वरिसु के गीत ती तलपति ने विजय को एक जननायक की छवि प्रदान की। तलैवा और तलपति या दलपति सिनेमाई उपाधियों के बजाय विजय के राजनीतिक परिज्ञापक बन गये।
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अपने समर्थकों के लिए विजय कोई पारंपरिक राजनेता नहीं हैं बल्कि वह व्यक्ति है जिसमें वे सिनेमा के जरिए भावनात्मक निवेश कर चुके हैं। फिल्मी सितारा होने से विजय भले ही पहले से लोकप्रिय थे किंतु उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदी उनकी खिल्ली उड़ाने से नहीं चूके। विजय को अट्टाकत्ति अर्थात् कागजी चाकू, अणिल अर्थात् गिलहरी और उनके समर्थकों को तरकुरी अर्थात् अंगूठाछाप कहा गया। मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले भाषण में विजय ने अपने विरोधियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें तरकुरि कहने वालों का राजनीतिक जीवन अब एक केल्विकुरि अर्थात् प्रश्नचिह्न बनकर रह गया है।
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