It feels great to be recognized by Viki Rakuten for whatever little contribution I could made to their popular shows.
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तमिळनाड के प्रसिद्ध और लोकप्रिय उत्सव पोंगल की एक पारंपरिक व रोमांचकारी क्रीड़ा है जल्लीकट्ट। सल्ली मध्यकालीन दक्षिण भारत में प्रचलित एक प्रकार का सिक्का था और तमिळ में कट्ट का अर्थ होता है बांधना। जल्ली अथवा स्वर्णाभूषणों को बैल के सींगों पर बाँधे जाने का खेल सल्लीकट्ट या जल्लीकट्ट कहलाया। जल्लीकट्ट के दूसरे नाम […]
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त्रिशूर पूरम मलयालम कालगणना के अनुसार मेडम माह (अप्रेल-मई) में चंद्रमा के पूरम नक्षत्र में प्रवेश करने के दिन मनाया जाने वाला एक भव्य वार्षिक उत्सव है। दो सौ वर्ष पूर्व कोच्चि के राजा शक्तन तांपुरन ने इस उत्सव को मनाना प्रारंभ किया था। इसका आयोजन त्रिशूर के वडक्कनाथन (शिव) मंदिर में होता है। त्रिशूर […]
Read More..मलयाळम में तुंचन का अर्थ सबसे छोटा और एलुदच्चन का अर्थ लेखन का पिता होता है। किंतु तुंचत्त एलुदच्चन मलयाळम के कवियों में महानतम हैं। मलयाळम कालगणना के अंतिम माह कर्किडकम का केरला में विशेष आध्यात्मिक महत्त्व है। मध्य जुलाई से मध्य अगस्त तक की इस अवधि को रामायण माह कहा जाता है। इस अवधि […]
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. “तेरी बनाई रोटियां ढुंगड़ी लगती हैं” . “वह क्या होता है” . “जंगल में पत्थर पर बनाई रोटियां जो गोर चराने जाते हैं तब बनाते हैं” . मैं समझ गया कि अच्छी रोटियां बनाने में अभी कुछ और कसर बाकी है। आटा अच्छे से गूंथ लेता हूं। लोइयां भी सही बना लेता हूं, रोटी […]
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. भारतीय रैपर अर्थात् क्षिप्रगायक बाबा सहगल ने रोजा फिल्म का गाना रुक्मिणी! रुक्मिणी! गाया था। हाल ही में अपने एक साक्षात्कार में उन्होंने इस गीत के बोलों को लेकर अपनी पहली प्रतिक्रिया बताई। गाने के बोल सुनकर उन्होंने कहा, “कितने वाहियात लिरिक्स हैं यार, किसने लिखा है ये?” इसके साथ ही उन्होंने अनुवाद की […]
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पचहत्तर वर्ष पूर्व स्वतंत्र भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी ने एक वक्तव्य दिया था कि कन्नड़ा तमिळ से जन्मी भाषा है। कन्नड़ा साहत्यिकारों द्वारा इस वक्तव्य के कड़े विरोध के बाद उन्हें क्षमायाचना करनी पड़ी थी। भाषायी बयानबाजी को लेकर बदहजमी की यह शिकायत अब भी बनी हुई है इसका पता हाल […]
Read More... सन 1953 में वी शांताराम की एक फिल्म आई थी तीन बत्ती चार रास्ता जिसमें भारत की भाषायी विविधता को विषय बनाया गया था। इसके चार वर्ष पूर्व 14 सितंबर 1949 को हिन्दी को भारत की आधिकारिक भाषा घोषित किया गया था। हालांकि तमिळनाडु मे हिन्दी का विरोध स्वतंत्रता के पूर्व 1937 में ही […]
Read More... कांजीवरम की रेशमी साड़ी देवताओं की भी प्रिय रही है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार ऋषि मार्कंडेय देवताओं के प्रधान बुनकर थे। वह कमल के रेशे से भी वस्त्र बुन सकते थे। उन्हें कांजीवरम बुनकरों का पूर्वज माना जाता है। . एक बार भगवान शिव ने मार्कण्डेय ऋषि से संसार के लोगों की नग्नता […]
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इस वर्ष भी मेरे तमिळ मित्र रंजीत ने मुझे मीनभरणी उत्सव में आने का निमंत्रण दिया है। अब तक दो बार मैं इसे देख चुका हूं। भौगोलिक दूरी के बावजूद तीसरी बार वहां जाने के लिए मेरे उत्साह में कोई कमी नहीं है। यह उत्सव है ही ऐसा। इसकी परम्परा और रीतियां भक्तों और पर्यटकों […]
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