Tag: पोंगल

जल्‍लीकट्ट

जल्‍लीकट्ट: तम‍िळ पौरुष की ललकार, आ बैल मुझे मार!

तम‍िळनाड के प्रस‍िद्ध और लोकप्रि‍य उत्‍सव पोंगल की एक पारंपरि‍क व रोमांचकारी क्रीड़ा है जल्‍लीकट्ट। सल्ली मध्यकालीन दक्षिण भारत में प्रचलि‍त एक प्रकार का सिक्का था और तम‍िळ में कट्ट का अर्थ होता है बांधना। जल्ली अथवा स्‍वर्णाभूषणों को बैल के सींगों पर बाँधे जाने का खेल सल्‍लीकट्ट या जल्लीकट्ट कहलाया। जल्लीकट्ट के दूसरे नाम […]

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तम‍िळनाड बनाम तम‍िळगम: “शब्‍दभेदी” बाण और “राज्यनीत‍िक” औच‍ित्‍य

. आमतौर पर गैरतम‍िळ अपने तम‍िळ भाषा के अज्ञान के कारण तम‍िळों के न‍िशाने पर रहते हैं। क‍िंतु इस बार कुछ व‍िपरीत हूआ है। अज्ञान की भांत‍ि अत‍िज्ञान भी कभी कभी व‍िवाद उत्‍पन्‍न कर देता है। यह प्रसंग इसी बात का एक अच्‍छा उदाहरण है। तम‍िळनाड में पोंगल के हर्षोल्‍लास के वातावरण में एक शासकीय […]

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