Category: Self-expressions

Certificate of Appreciation

It feels great to be recognized by Viki Rakuten for whatever little contribution I could made to their popular shows.

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रोटी

छोटी रोटी, मोटी रोटी

. “तेरी बनाई रोटियां ढुंगड़ी लगती हैं” . “वह क्‍या होता है” . “जंगल में पत्‍थर पर बनाई रोटियां जो गोर चराने जाते हैं तब बनाते हैं” . मैं समझ गया कि अच्‍छी रोटियां बनाने में अभी कुछ और कसर बाकी है। आटा अच्‍छे से गूंथ लेता हूं। लोइयां भी सही बना लेता हूं, रोटी […]

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हिन्‍दी सिने गीतों में बिखरी प्रादेशिक भाषाओं की छटा

. सन 1953 में वी शांताराम की एक फिल्‍म आई थी तीन बत्ती चार रास्‍ता जिसमें भारत की भाषायी विविधता को विषय बनाया गया था। इसके चार वर्ष पूर्व 14 सितंबर 1949 को हिन्‍दी को भारत की आधिकारिक भाषा घोषित किया गया था। हालांकि तमिळनाडु मे हिन्‍दी का विरोध स्‍वतंत्रता के पूर्व 1937 में ही […]

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एनिमल के यौन आखेट का व्‍याधगीत: जमाल कोदु

. हिन्‍दी में एक कहावत है, हाथ कंगन को आरसी क्‍या पढ़े लिखे को फारसी क्‍या। यह कहावत संभवत: तब से चली आ रही है जबसे भारत में फारसी एक प्रमुख प्राशासनिक भाषा थी। फारसी भाषा का उद्भव पहलवी भाषा से हुआ है। पहलवी और संस्‍कृत भगिनी भाषाएं हैं। अस्‍तु, हिन्‍दी-अंगरेजी के इस युग में […]

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मलयालम की मेरी एकलव्‍य साधना

प्रारंभ में ही स्‍पष्‍ट करना चाहूंगा क‍ि शीर्षक में उल्‍ल‍िख‍ित एकलव्‍य की प्रत‍िभा और न‍िष्‍ठा से मेरा कोई सादृश्‍य नहीं है। क‍िंतु गुरू का अभाव एकमात्र कारण है जो मुझे एकलव्‍य और अपने ल‍िए एक सा जान पड़ता है। लगभग एक दशक पूर्व तम‍िळ सीखने की मेरी इच्‍छा मुझे मलयालम सीखने की ओर ले गयी […]

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कैशोर्य की काव्‍यरचना: बाल श्रम‍िक

. कुछ द‍िनों पहले अपनी पुरानी वस्‍तुएं न‍िहारते हुए एक स्‍वरच‍ित कव‍िता “बाल श्रम‍िक” हाथ लग गयी। शेष कव‍िताओं की तुलना में यह इसल‍िए व‍िश‍िष्‍ट थी क‍ि मैंने इसे व‍िद्यालय स्‍तरीय कव‍िता प्रत‍ियोग‍िता में भेजने का न‍िश्‍चय क‍िया था। इसे टंक‍ित करवाकर मैं अपने प्रधानाचार्य से हस्‍ताक्षर‍ित करवाने भी गया था। अपना संकोच छोड़कर इतना […]

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कुश की अंगूठी पव‍ित्री

पव‍ित्री: एक गुमशुदा नाम की घरवापसी

दोपहर को डाक‍िया मां के हाथ में ल‍िफाफा थमा गया। मां उसे मुझे देते हुए बोली, “देख तो, आधार कार्ड आ गया है शायद। ल‍िफाफा खोलकर देखा तो मेरी बांछे ख‍िल गयीं। प‍िछले दो वर्षों की मेरी दौड़ धूप सफल हो गयी। मां का आधार कार्ड उनके मौल‍िक नाम व जन्‍मत‍िथ‍ि के साथ अद्यतन‍ित (updated) […]

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अनुवादक की दुव‍िधा:घरवाली या बाहरवाली

. 26 स‍ितंबर 2021 . यूं तो कुछ ल‍िखने की इच्‍छा मन में सदा से रही क‍िंतु जब भी ल‍िखने की बारी आती है तो मन असमंजस में पड़ जाता क‍ि क्‍या ल‍िखें। यह वेब पृष्‍ठ व‍िचारों की एक गुल्‍लक की तरह है ज‍िसमें मन में बरबस उठने वाले व‍िचारों को सहेजने का प्रयास भर […]

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Spectrum of Sound through Prism of Subtitle

Remember the time when cinema was silent and there used to be few subtitles in it. Now the cinema talks and therefore subtitles have evolved remarkably. Now they serve to maximize the approach of cinema to a global audience. They are not only meant for the people who do not understand a particular language but […]

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Thalaivi

थलाइवी: अंग्रेज़ी की ताल पर ह‍िन्‍दी की ता ता थैया

तम‍िळनाड की मुख्‍यमंत्री जयलल‍िता की जीवनी पर आधार‍ित कंगना रणौत के बहुप्रतीक्ष‍ित और बहुभाषी चलच‍ित्र का व‍िज्ञापन जारी हो चुका है और पर्याप्‍त प्रशंसा भी बटोर रहा है। जयलल‍िता को अभ‍िनेत्री और नेत्री दोनों के रूप में तम‍िळनाड के लोगों का भरपूर प्‍यार म‍िला। कंगना का व्‍यक्‍त‍ित्‍व भी जयलल‍िता से मेल खाता सा लगता है। […]

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